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अब नोएडा में भी कुत्तों का खौफ कुत्ते से हो जाए सावधान….

इन दिनों देश के विभिन्न कोणों से कुत्ते के हमले में घायल होने की खबर सामने आती रहती है चाहे फिर वह कुत्ते अपने घर के मालिक पर हमला कर दें या आसपास के लोगों पर या अपरिचित लोगों पर । क्या कुत्ते खतरनाक हो गए हैं या उन्हें रखना जो है वह खतरनाक साबित हो रहा है जानिए पूरी बात ।

कुत्तों से डरना जरूरी है! पिछले 2-3 महीने में नोएडा, गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में कुत्तों के हमले जिस तरह से बढ़े हैं उसने लोगों को खौफजदा कर दिया है। कुछ घंटे पहले नोएडा की एक पॉश सोसायटी में तीन कुत्तों के काटने से 7 महीने के बच्चे की मौत हो गई। बच्चा इतनी बुरी तरह से घायल हुआ था कि उसकी आंतें बाहर निकल आईं। रात में बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह बच्चा एक मजदूर का था, जो नोएडा के लोटस बुलेवर्ड सोसायटी में काम करता है। बताते हैं कि मां अपने बच्चे को सुलाकर काम करने जा रही थी तभी तीन आवारा कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया। अस्पताल में बच्चे की सर्जरी की गई लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई। आए दिन डॉग अटैक के मामले सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। आज सुबह जैसे ही मामले की जानकारी हुई सोसायटी के लोगों ने प्रदर्शन किया। सोसायटी में कुत्तों के घूमने और प्रशासन के ठोस कदम न उठाने को लेकर लोगों ने आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि कुत्तों के हमले के लिए जिम्मेदार कौन है? सोसायटी के लोगों का कहना है कि जो भी सुरक्षा गार्ड होते हैं वे कुछ लोगों की सुरक्षा को ज्यादा अहमियत देते हैं। सोसायटी के प्रबंधन पर भी सवाल उठे हैं।

सोसायटी के अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मवीर यादव ने कहा, ‘सोसायटी के लोग कुत्तों से परेशान हैं। कई बार सोसायटी की तरफ से इस समस्या को ठीक करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाधान नहीं हो पाया।’ उन्होंने कहा कि कई बार नोएडा प्राधिकरण से लावारिस कुत्तों को लेकर शिकायत की गई, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिस तरह से कुत्तों के हमले से मासूम की मौत हुई है, सोसायटी के लोग दहशत में है। यहां के बच्चे और महिलाएं घरों से बाहर निकलने से घबरा रहे हैं। कुछ दिन पहले यहां मौजूद कुत्तों की नसबंदी की गई थी, जिसके बाद उन्हें वापस लाकर यहीं छोड़ दिया गया, जिससे समस्या और बढ़ गई।

डॉग लवर्स नहीं मानने को है तैयार कुत्ते कि गलती

आक्रोशित लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा गार्ड कुत्तों को रोकते हैं तो डॉग लवर आगे आ जाते हैं। लोगों ने आज सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। नोएडा पुलिस के अधिकारी मौके पर लोगों की समझाने की कोशिश करते रहे। एक शख्स ने कहा कि ऐक्शन की बातें होती हैं लेकिन सच में कोई कार्रवाई की गई होती तो 7 महीने के बच्चे की मौत नहीं होती। ये हमले किसी एक सोसायटी में नहीं हो रहे, सभी सोसायटियों का यही हाल है।
सितंबर में गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन की चार्म कैसल सोसायटी में लिफ्ट के अंदर कुत्ते ने एक बच्चे को काट लिया था। हैरानी की बात है कि कुत्ते की मालकिन साथ में थी और उन्होंने ऐसे बर्ताव किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। बाद में गाजियाबाद नगर निगम ने 5 हजार रुपये का जुर्माना ठोका। घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। सोसायटी के लोगों ने विरोध किया तो मेंटेनेंस स्टाफ ने सभी लिफ्ट में कुत्ते को नहीं ले जाने का नोटिस चस्पा कर दिया।

सितंबर के महीने में नोएडा में सेक्टर 75 की अपैक्स सोसायटी में डिलिवरी बॉय को कुत्ते के काटने का मामला सामने आया था। वह पास के ही मेडिकल स्टोर का डिलिवरी बॉय था और सोसायटी के एक टावर में दवाई देने गया था। कुत्ते का मालिक भी साथ था लेकिन कुत्ते ने लिफ्ट में काट लिया। चिंता की बात यह है कि लोग अपने पालतू कुत्ते के मुंह पर लगाम भी नहीं लगाते।

पूरे मामले पर सुने पुलिस का कथन…

पुलिस का कहना है कि अगर पालतू कुत्ते के हमले में कोई घायल होता है और केस दर्ज किया जाता है तो ऐसे मामले में गिरफ्तार करने का प्रावधान नहीं है। पुलिस आरोपी के खिलाफ नोटिस जारी करती है और साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करती है। काला पत्थर रोड पर आम्रपाली विलेज सोसायटी में भी सितंबर के आखिरी हफ्ते में एक 11 साल के बच्चे को आवारा कुत्ते ने काट लिया था। अगस्त में लोनी बॉर्डर के पास सात साल की बच्ची के कान में पिटबुल कुत्ते ने काट लिया था। कुत्तों के हमले से बचने के लिए सोसायटियों में नियम बने हैं लेकिन पालन नहीं किया जाता है।

 

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