धर्ममनोरंजन

भोलेनाथ की नगरी देवघर में मौजूद ये वॉटरफॉल अद्भुत खूबसूरती के लिए हैं प्रसिद्ध…!

झारखंड राज्य का देवघर शहर भगवान शिव की नगरी के नाम से पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस पवित्र शहर को बाबाधाम की नगरी से भी जाना जाता है। देवघर में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग है। यह शहर झारखंड के अन्य शहरों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि सावन के महीने में यहां ज्योतिर्लिंगों पर जल अभिषेक के लिए करोड़ों भक्त पहुंचते हैं।

लेकिन, इस पवित्र स्थल के आसपास कुछ ऐसी भी जगहें हैं जहां घूमने के लिए भी हर रोज हजारों भक्त या सैलानी पहुंचते हैं। जी हां, इस खूबसूरत शहर के आसपास कुछ अद्भुत झीलें मौजूद हैं जिनका नज़ारा देखने के लिए सैलानियों की भीड़ उमड़ जाती हैं। ऐसे में अगर आप भी सावन के महीने में शिवलिंग पर जल अभिषेक करने या देवघर घूमने का प्लान बना रहे हैं इन झीलों को यात्रा में ज़रूर शामिल करें। आइए जानते हैं।

 

उसरी वाटरफॉल

उसरी जलप्रपात गिरिडीह

उसरी वॉटरफॉल देवघर के साथ गिरिडीह और पूरे झारखंड के लिए एक फेमस स्थान है। वॉटरफॉल का पानी लगभग 40 फीट की ऊंचाई से गिरने के बाद तीन धाराओं में बंट विभाजित होता है। वॉटरफॉल का पानी पहाड़ों पर बहना और नीचे गिरने के बाद घने जगलों से होकर बहते जाना को देखर मन तृप्त हो सकता है। कहा जाता है कि यहां की वादियों व पत्थरों की बनावट को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि कुदरत ने सिर्फ इसी शहर के लिए तरशा है। आपको बता दें कि मानसून के समय यहां सबसे अधिक सैलानी पहुंचते हैं।

औषधीय वॉटरफॉल/ त्रिकुट वॉटरफॉल

औषधीय वॉटरफॉल जिसे कई लोग त्रिकुट पर्वत वॉटरफॉल के नाम से भी जानते हैं। इस वॉटरफॉल को लेकर कई पौराणिक कथा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि झरने का पानी कई बीमारियों के लिए फायदेमंद होता है। इस झरने के पानी को लेने के लिए दूर-दूर से लोग भी पहुंचते हैं। इस झरने को रावण और भोलेनाथ से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में अगर आप भी देवघर जा रहे हैं तो औषधीय वॉटरफॉल घूमने के लिए ज़रूर पहुंचे।

मारीचो वॉटरफॉल

देवघर से लगभग 1 घंटे की दूरी पर मौजूद मारीचो वॉटरफॉल एक फेमस पर्यटन स्थल है। इस अद्भुत जलप्रपात की मनोरम दृश्य की खूबसूरती की दास्तान दूर से बयां करती है। खासकर, सावन या मानसून के महीने में यहां सबसे अधिक सैलानी घूमने के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि जो भी देवघर घूमने के लिए जाता है वो यहां ज़रूर पहुंचता है। हालांकि, मानसून में पानी का प्रभाव अधिक रहता है इसलिए खतरे से सावधान रहे।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button