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डाक बम बनकर 20 साल में 74 बार गए बाबा धाम .. तीसरी बार बनकर पहुंचे दंडी बम.. कहा – बाबा से जो मांगा सब पूरा हुआ, पढ़िए आस्था की ये बेजोड़ कहानी

TEAM_JILLATOP : कहा जाता है की जिसके कोई नहीं होते उसके साक्षात् बाबा बैद्यनाथ यानि महादेव होते हैँ l शायद यही कारण है की आस्था की अलग अलग कहानियां आपको इस सावन में बिहार के सुल्तानगंज गंगा घाट से लेकर झारखण्ड देवघर के बाबाधाम मंदिर तक देखने को मिल जाएगी l
सावन माह की शुरुआत के साथ ही सुल्तानगंज से बाबा बैजनाथ तक की यात्रा शुरू हो जाती हैं।करीबन 105 किलोमीटर की यात्रा में भारी संख्या में लोग पूजा अर्चना करने जाते हैं।

किसी की मन्नते पूरी हो जाती तो कोई मन्नते मांगने के लिए बाबा के दरबार अर्जी लगाने जाते हैं। कोई कहता है कि वह विश्व शांति के लिए बाबा के दरवार जा रहे। वही कुछ कहते हैं कि बाबा के एकमात्र दर्शन के लिए वह लंबी यात्रा तय कर बाबा बैधनाथ तक जाते हैं।

चाहें बच्चे हो, बड़े हो, पुरुष हो या महिला कोई ऐसा नहीं जिसके अंडर से बोल बम का नारा ना गूँजता हो l बाबा की एक झलक पाने को बेकरार जो भीड़ सुल्तानगंज से देवघर पैदल 105 किलोमीटर नाप देती है उन्हें हम बम बुलाते हैँ l

उनमें से ही एक बम है समस्तीपुर के रामसकल महतो और उनके दोस्त नरेश पासवान।

रामसकल महतो बताते हैं कि उनकी उम्र करीबन 55 वर्ष है और अब तक 74 बार डाक बम जा चुके हैं।और तीसरी बार दंडी देकर बाबा दरबार पहुंचेंगे।
रामसकल महतो ने बताया कि 1990 से 2011 तक 74 बार वो डाक बम का यात्रा कर चुके है।सावन के हर सोमवार को वो डाक बम बन बाबा दरबार जल लेकर पहुंचते थे।

फिर कुछ दिनों का अंतराल रहा और अब फिर 2018,2019 और 2022 में दंडी बम बन कर बाबा दरबार तक पहुँच रहे है।

रामसकल महतो ने बताया कि जिस वक्त की वो डाक बम बन जाया करते थे उस वक्त उन्होंने वैजनाथ से कुछ मन्नते मांगी थी। बैजनाथ को कहा था कि बाबा मेरे बेटे की नौकरी हो जाए और मुझे पौत्र सुख प्राप्त हो।
भक्त रामसकल की दोनों ही मुरादे पूरी हो गई है। जिसके बाद रामसकल दंडी देकर बाबा के दरबार तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस यात्रा में कोई थकान तक महसूस नहीं होती।और खुशी खुशी यात्रा करते है।

रामसकल महतो के ही एक मित्र नरेश पासवान भी समस्तीपुर से बाबा के आशीर्वाद पाने के लिए खींचे चले आए हैं। नरेश पासवान बताते हैं कि इस साल वो पहली बार दंडी देकर बाबा दरबार पहुंच रहे है।कोई मन्नते नहीं है।सिर्फ बाबा के दर्शन हो जाए इसलिए दंडी देकर बाबा दरबार पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में करीबन 1 महीने कुछ रोज लग जाते हैं  l

कौन होते हैँ साधारण बम, डाक बम और दंडी बम

आमतौर पर जो लोग भी सुल्तानगंज से बाबा मंदिर देवघर तक यात्रा कर जाते हैँ उन्हें बम कहा जाता है l लेकिन इन बम में भी तीन श्रेणी होती है l कुछ लोग बिना समय बाध्यता के सुल्तानगंज से देवघर की यात्रा पूरी करते हैँ l इन्हें साधारण बम कहा जाता है l

लेकिन कुछ ऐसी बम भी होते हैँ जिन्हे 24 घंटे के अंदर गंगा जी से जल लेकर मंदिर में विराजमान बाबा बैद्यनाथ पर अर्पण करना होता है l ये बम दौड़ते हुए 105 किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैँ  l सरकार या स्थानीय लोगो द्वारा इनका विशेष ध्यान भी रखा जाता है l  और इन्हें हीं डाक बम कहते हैँ l

आख़िरी में आते हैँ दंडी बम l इनकी यात्रा सबसे कस्टकारी मनी जाती हैँ l कारण ये है की ये अपने शरीर की लम्बाई को नाप कर पूरी 105 किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैँ l दिन भर में तकरीबन 1000-1500 दंड लगाना, फिर जहाँ शाम हो वहां रुकना, और एक महीने से ज्यादा समय तक इस यात्रा को करना अपने आप में असाधारण बात है l पर शायद में महादेव की भक्ति और उनके भक्तों का उनके लिए प्यार हीं है जो लोगों को इतनी ताकत दे देता है की भक्त असाधारण सी दिखने वाली चीज़ों को भी आसान मामूली और साधारण बना देते हैँ l

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